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Visit Website- बालिका का जन्म 01 जनवरी 2006 अथवा उसके बाद हुआ हो।
- बालिका स्थानीय आंगनवाड़ी केन्द्र में पंजीकृत हो।
- माता-पिता मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने चाहिए।
- माता-पिता आयकरदाता (Income Tax Payer) नहीं होने चाहिए।
बालिका का जन्म 01 जनवरी 2006 अथवा उसके बाद हुआ होना चाहिए।
बालिका का स्थानीय आंगनवाड़ी केन्द्र में पंजीकरण होना आवश्यक है।
माता-पिता मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने चाहिए।
माता-पिता आयकरदाता (Income Tax Payer) नहीं होने चाहिए।
परिवार में दो या दो से कम संतान हों तथा दूसरी संतान के बाद परिवार नियोजन अपनाया गया हो।
प्रथम प्रसव से जन्मी बालिका को बिना परिवार नियोजन के भी योजना का लाभ मिलेगा।
द्वितीय प्रसव से जन्मी बालिका के लिए माता या पिता द्वारा परिवार नियोजन अपनाना अनिवार्य है।
यदि परिवार में अधिकतम 02 संतान हैं तथा माता या पिता की मृत्यु हो गई है, तो बालिका के जन्म के 05 वर्ष तक पंजीकरण कराया जा सकता है।
यदि दूसरी शादी के बाद पहले से 02 बच्चे हैं, तो दूसरी शादी से जन्मी पुत्री को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
प्रथम प्रसव में एक साथ 03 बालिकाओं के जन्म पर तीनों को योजना का लाभ मिलेगा।
जेल में बंद महिला कैदियों से जन्मी पात्र बालिकाओं को भी योजना का लाभ दिया जाएगा।
बलात्कार पीड़ित महिला या बालिका से जन्मी पुत्री भी योजना के लिए पात्र होगी।
स्वास्थ्य कारणों से परिवार नियोजन न अपनाने वाले मामलों में कलेक्टर 02 वर्ष तक प्रकरण स्वीकृत कर सकते हैं।
विलंब से प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद जिला कलेक्टर स्वीकृति या अस्वीकृति प्रदान करेंगे।
अनाथालय/संरक्षण गृह अथवा दत्तक लेने वाले माता-पिता द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना आवश्यक होगा।
मध्यप्रदेश में लिंगानुपात (Sex Ratio) में सुधार लाना।
बालिका जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना।
बालिकाओं की शिक्षा एवं स्वास्थ्य में सुधार करना।
राज्य में जनसंख्या वृद्धि दर को नियंत्रित करना।
परिवार नियोजन को बढ़ावा देना तथा दो बेटियों के बाद पुत्र की चाह को कम करना।
बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करना।
कन्या भ्रूण हत्या एवं शिशु हत्या जैसी कुप्रथाओं को रोकना।
बालिकाओं के विकास हेतु सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण तैयार करना।
बाल विवाह को रोकना तथा कानूनी आयु में विवाह को प्रोत्साहित करना।



